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पश्चिम बंगाल समेत चार विधानसभाओं में महिलाओं का वोटिंग पैटर्न कैसा रहा?
- Author, संजय कुमार
- पदनाम, चुनाव विश्लेषक और सेफ़ोलॉजिस्ट
- Author, विभा अत्री और अरिंदम कबीर
- पदनाम, शोधकर्ता, लोकनीति-सीएसडीएस
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
केरल, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों ने भारतीय चुनावी राजनीति की एक स्थापित विशेषता को फिर से साबित किया है.
यानी बड़ी संख्या में सक्रिय और मतदाताओं का सबसे प्रभावी हिस्सा महिलाएं हैं.
इन चुनावों में महिलाओं का मतदान प्रतिशत ऊंचा रहा और कई मामलों में यह पुरुषों से भी थोड़ा अधिक रहा. इसकी वजह से चुनावी नतीजों में उनकी हिस्सेदारी केंद्रीय भूमिका में उभरकर सामने आई.
'पोल्समैप' के पोस्ट-पोल आंकड़ों के आधार पर यह लेख इन चुनावों में महिलाओं के मतदान पैटर्न का विश्लेषण करता है.
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केरल
केरल में महिलाओं का झुकाव यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ़) की तरफ़ ज़्यादा मज़बूती से दिखा. लगभग 48 प्रतिशत महिलाओं ने यूडीएफ़ का समर्थन किया, जबकि 36 प्रतिशत ने लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ़) और 14 प्रतिशत ने एनडीए का समर्थन किया.
पुरुषों ने भी यूडीएफ़ का समर्थन किया, लेकिन उतने निर्णायक तरीक़े से नहीं. क़रीब 45 प्रतिशत पुरुषों ने यूडीएफ़ और 39 प्रतिशत ने एलडीएफ़ का समर्थन किया. राज्य में पुरुषों और महिलाओं दोनों ने यूडीएफ़ को पहली पसंद के रूप में चुना. (टेबल 1)
अगर पूरे पैटर्न को देखें तो केरल में महिला वोटरों के बीच स्थान, उम्र और तबके के आधार पर और भी अंतर दिखाई दिए. ग्रामीण और शहरी विभाजन का साफ़ अंतर था. ग्रामीण महिलाएं यूडीएफ़ (38 प्रतिशत) की तुलना में एलडीएफ़ (42 प्रतिशत) की तरफ़ ज़्यादा झुकी हुई थीं.
जबकि शहरी महिलाओं में एलडीएफ़ (करीब 30 प्रतिशत) के मुकाबले यूडीएफ़ (60 प्रतिशत) के लिए मज़बूत और निर्णायक समर्थन दिखा. मतदान व्यवहार में यह एक स्पष्ट भौगोलिक अंतर दिखाता है. (टेबल 1)
45 वर्ष तक की कम उम्र की महिलाओं में 50 प्रतिशत से ज़्यादा ने यूडीएफ़ का समर्थन किया, जबकि उम्रदराज़ महिलाओं के बीच इस गठबंधन के प्रति समर्थन में गिरावट दिखी और उनका झुकाव अपेक्षाकृत एलडीएफ़ की तरफ़ ज़्यादा रहा.
वर्गीय अंतर भी काफ़ी अहम था. ग़रीब और निम्न आय वाले परिवारों की महिलाओं में एलडीएफ़ के प्रति ज़्यादा समर्थन था, क्रमशः क़रीब 47 प्रतिशत और 43 प्रतिशत.
जबकि मध्यम और संपन्न वर्ग की महिलाओं ने यूडीएफ़ के लिए स्पष्ट रुझान दिखाया, जहां उन्होंने इस गठबंधन को लगभग 52 से 56 प्रतिशत तक वोट दिया. (टेबल 2)
तमिलनाडु
तमिलनाडु में महिला मतदाताओं का रुझान अपेक्षाकृत बंटा हुआ दिखा, लेकिन साफ़ तौर पर चुनावी विकल्प को लेकर उनमें एक ढांचागत पैटर्न दिखा.
कुल मिलाकर महिलाएं सबसे ज़्यादा टीवीके की तरफ़ झुकी हुई दिखीं (38 प्रतिशत), इसके बाद डीएमके गठबंधन (31 प्रतिशत) और एडीएमके गठबंधन (25 प्रतिशत) रहे. इससे संकेत मिलता है कि महिलाओं के बीच टीवीके सबसे बड़ी पसंद बनकर उभरी.
पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने टीवीके के लिए ज़्यादा समर्थन और एडीएमके गठबंधन के लिए अपेक्षाकृत कम झुकाव दिखाया, जबकि डीएमके के प्रति समर्थन महिलाओं और पुरुषों दोनों में लगभग एक जैसा रहा. (टेबल 3)
ग्रामीण और शहरी विभाजन भी काफ़ी स्पष्ट था. 33 प्रतिशत ग्रामीण महिलाओं की पसंद डीएमके गठबंधन, 31 प्रतिशत एडीएमके गठबंधन और 31 प्रतिशत टीवीके रहा. यानी महिलाओं की पसंद तीनों तरफ़ लगभग बराबर बंटी रही और इससे संकेत मिलता है कि कड़ा त्रिकोणीय मुक़ाबला था.
इसके उलट शहरी महिलाओं ने टीवीके की तरफ़ मज़बूत झुकाव दिखाया और 45 प्रतिशत ने उसका समर्थन किया. जबकि डीएमके गठबंधन को 30 प्रतिशत और एडीएमके गठबंधन को 19 प्रतिशत शहरी महिला मतदाताओं का समर्थन मिला. (टेबल 3)
उम्र के आधार पर अंतर बेहद स्पष्ट था और इसने जेनरेशनल शिफ़्ट यानी पीढ़ीगत बदलाव का संकेत दिया. कम उम्र की महिलाओं ने टीवीके का मज़बूती से समर्थन किया और उम्र बढ़ने के साथ यह समर्थन लगातार घटता गया, जबकि डीएमके और एडीएमके गठबंधनों को उम्रदराज़ महिलाओं के बीच अपेक्षाकृत ज़्यादा समर्थन मिला. (टेबल 4)
वर्गीय आधार पर अंतर भी इसी तरह के रहे. ग़रीब महिलाओं के बीच वोट अपेक्षाकृत बंटे हुए थे, जहां एडीएमके गठबंधन को 36 प्रतिशत, टीवीके को 34 प्रतिशत और डीएमके गठबंधन को 27 प्रतिशत ग़रीब महिलाओं के वोट मिले.
आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ टीवीके के समर्थन में वृद्धि देखी गई. मध्यम और संपन्न वर्ग की महिलाओं के बीच टीवीके के प्रति यह समर्थन 41 और 42 प्रतिशत तक पहुंच गया.
ये आंकड़े दिखाते हैं कि टीवीके को कम उम्र और आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति वाली महिलाओं के बीच काफ़ी मज़बूत समर्थन मिला. जबकि उम्रदराज़ और ग़रीब महिलाएं पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों के बीच अधिक बंटी रहीं.
असम
असम में महिला मतदाताओं ने एनडीए के लिए साफ़ और एकजुट समर्थन दिखाया. 51 प्रतिशत महिलाओं ने एनडीए का समर्थन किया, जबकि 31 प्रतिशत ने एएसएम, 5 प्रतिशत ने एयूडीएफ़ और 14 प्रतिशत ने अन्य दलों का समर्थन किया.
पुरुषों की तुलना में महिलाएं एनडीए की ओर ज़्यादा झुकी दिखीं और एएसएम के लिए उनका समर्थन कम रहा. इससे महिलाओं के बीच एनडीए के पक्ष में एक सीमित लेकिन स्पष्ट लैंगिक अंतर दिखाई देता है. (तालिका 5)
वर्ग आधारित अंतर ने बेहतर आर्थिक स्थिति वाले समूहों में एनडीए की मज़बूती को और पुष्ट किया. आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ एनडीए का समर्थन लगातार बढ़ता गया. (तालिका 6)
एनडीए को कम उम्र और अधिक उम्र दोनों वर्गों की महिलाओं का मज़बूत समर्थन मिला. हालांकि 36 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में समर्थन थोड़ा घटा, लेकिन फिर भी यह करीब 45 प्रतिशत बना रहा.
कुल मिलाकर असम में महिलाओं का मतदान अधिकांश समूहों में एनडीए के साथ मज़बूत रूप से जुड़ा दिखा. असम में वोटिंग पैटर्न में जो अंतर था, वह दिशा के बजाय समर्थन की तीव्रता में अधिक दिखाई दिया.
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं का रुझान तृणमूल कांग्रेस+ गठबंधन (47 प्रतिशत) और बीजेपी (42 प्रतिशत) के बीच काफ़ी क़रीबी मुकाबले में बंटा दिखा. यहां दोनों के बीच अंतर अपेक्षाकृत कम था.
इसके उलट 50 प्रतिशत पुरुषों ने बीजेपी को और 36 प्रतिशत से ज़्यादा पुरुषों ने तृणमूल गठबंधन को समर्थन दिया. इससे मतदान पैटर्न में अधिक स्पष्ट लैंगिक अंतर दिखाई दिया. महिलाओं के बीच तृणमूल+ ने मामूली बढ़त बनाए रखी, लेकिन बीजेपी ने भी वोट का बड़ा हिस्सा अपनी ओर किया.
इससे संकेत मिलता है कि महिलाओं का समर्थन पूरी तरह तृणमूल+ के पीछे संगठित नहीं था और बीजेपी ने इस वर्ग में महत्वपूर्ण पैठ बनाई. (तालिका 7)
साल 2021 में महिलाओं का वोट टीएमसी के पक्ष में कहीं ज़्यादा ध्रुवीकृत था.
पश्चिम बंगाल में ग्रामीण और शहरी अंतर सीमित दिखा. यहां तृणमूल+ को मामूली बढ़त मिली, जबकि बीजेपी दोनों इलाक़ों में क़रीब रही. यह राज्य में उसकी बढ़ती पैठ का संकेत है. (तालिका 7)
अलग-अलग उम्र की सभी महिला समूहों का मतदान पैटर्न तृणमूल+ और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर दिखाता है. अलग-अलग आयु समूहों में कुछ अंतर ज़रूर थे, लेकिन कोई एक समान पैटर्न नहीं दिखा.
वर्ग आधारित अंतर यहां भी स्पष्ट थे. ग़रीब आर्थिक पृष्ठभूमि की 42 प्रतिशत महिलाओं ने बीजेपी को, जबकि 51 प्रतिशत ने तृणमूल+ को ज़्यादा समर्थन दिया.
निम्न आय और मध्यम वर्ग की महिलाओं में दोनों दलों के बीच अंतर कम रहा और मध्यम वर्ग में लगभग बराबरी की स्थिति दिखी, जहां तृणमूल+ को 45 प्रतिशत और बीजेपी को 44 प्रतिशत वोट मिले.
संपन्न महिलाओं के बीच तृणमूल+ को फिर से स्पष्ट बढ़त मिली. उसे 46 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि बीजेपी को 37 प्रतिशत समर्थन प्राप्त हुआ. (तालिका 8)
इन चुनावों ने अलग-अलग राज्यों में मतदान के अलग-अलग पैटर्न को सामने रखा है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि महिलाओं की चुनावी भागीदारी लगातार बढ़ रही है. और वे ऐसा मतदाता वर्ग बन चुकी हैं, जिसे कोई भी राजनीतिक दल नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता.
संजय कुमार एक चुनाव विश्लेषक और सेफ़ोलॉजिस्ट हैं.
विभा अत्री और अरिंदम कबीर लोकनीति-सीएसडीएस में शोधकर्ता हैं.
(लेखकों के विचार उनके निजी हैं. यह किसी भी संस्था के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करता.)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित