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फाल्टा सीटः बीजेपी जीती, चुनाव मैदान से हटने के बाद भी क्यों पड़े जहांगीर ख़ान के नाम पर वोट
पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के देबांग्शु पांडा एक लाख से ज़्यादा वोटों से जीत गए हैं. उन्होंने 149666 यानी कि 71.2% वोट हासिल किए.
राजनीतिक पंडितों को चौंकाते हुए दूसरे नंबर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के शंभु नाथ कुर्मी रहे, जिन्हें 40645 (19.34%) वोट मिले. कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर रही जिसके प्रत्याशी अब्दुर रज़्ज़ाक को 10084 (4.8%) वोट मिले.
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर ख़ान के नाम पर भी 7783 (3.7%) वोट मिले हैं, हालांकि मतदान से पहले उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का एलान किया था.
यहां 21 मई को फिर से मतदान कराया गया था और रविवार को इस सीट पर मतगणना हुई..
जहांगीर ख़ान ने दोबारा मतदान से सिर्फ़ दो दिन पहले 19 मई को चुनाव से हटने का एलान किया था.
उन्होंने इसकी वजहों में नई सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के विकास संबंधी वादों का ज़िक्र किया.
हालांकि टीएमसी ने कहा कि जहांगीर ख़ान का फ़ैसला पार्टी का नहीं है.
हाल ही में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में बीजेपी को भारी बहुमत मिला और वह पहली बार राज्य की सत्ता में आई. शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने.
उधर, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने फाल्टा में पुनर्मतदान की मतगणना पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने दावा किया कि फाल्टा में 1000 से ज़्यादा उनके पार्टी के कार्यकर्ताओं को घर छोड़ना पड़ा है.
फ़ाल्टा चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने एक लंबा वीडियो जारी किया. उन्होंने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए.
ममता बनर्जी ने क्या कहा
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी के अनुसार पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव नतीजों के 20 दिनों बाद पहली बार बीजेपी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं.
रविवार को फाल्टा विधानसभा सीट के चुनाव नतीजे के दिन उन्होंने एक्स पर पोस्ट 32 मिनट लंबे वीडियो में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर कटाक्ष करते हुए कहा, "आपने भवानीपुर सीट कैसे जीती है, यह मैं अदालत में बताऊंगी. अगर आप में हिम्मत है तो फोरेंसिक जांच कराएं. मुझे ईवीएम की रिपोर्ट चाहिए."
शुभेंदु अधिकारी का नाम लिए ममता ने कहा, "वो सारदा से नारदा तक तमाम घोटाले में शामिल हैं. वो जिस कुर्सी पर हैं उस पर बैठने के लायक ही नहीं हैं. उनको तो पहले जेल जाना चाहिए था."
ममता ने दावा किया कि 'नतीजे के बाद 20 दिनों तक वो मुंह बंद कर सब कुछ सहती रही हैं. 12 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोग आत्महत्या करने पर मजबूर हैं. लोगों से जबरन इस्तीफ़े लिए जा रहे हैं.'
उन्होंने दावा किया कि 'वोटों की हेराफेरी के कारण क़रीब डेढ़ सौ सीटों पर पासा पलट गया'. ऐसा नहीं होता तो तृणमूल कांग्रेस को 220 से 230 तक सीटें मिली होतीं.
फाल्टा सीट क्यों रही चर्चा में
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुए थे और चार मई को परिणाम आए थे. इन चुनावों में बीजेपी ने 207 सीटें और टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं.
दूसरे चरण के मतदान के दौरान फाल्टा सीट पर भी मतदान हुआ था. हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर अनियमितताएं पाईं और उसके बाद 21 मई को दोबारा मतदान की घोषणा की थी.
फाल्टा विधानसभा पहले से चर्चाओं में रहा था. बीजेपी का आरोप था कि स्थानीय टीएमसी नेता जहांगीर ख़ान लोगों का उत्पीड़न करते हैं. तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी को इस सीट पर चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी.
चुनाव प्रक्रिया के दौरान यहां ऑब्ज़र्वर बनाए गए यूपी के चर्चित आईपीएस अजयपाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ था.
इसमें अजयपाल शर्मा ने जहांगीर को चेतावनी दी थी. वीडियो में वह कहते दिखे, "अच्छी तरह से समझ लें, किसी ने बदमाशी की तो कायदे से इलाज किया जाएगा. कहीं से ख़बर आई कि किसी ने कोई ख़ुराफ़ात की, किसी को परेशान करने की कोशिश की तो उसकी अच्छी से ख़बर ली जाएगी. जहांगीर के घरवाले भी ये सुन लें. उसे बता देना. बार-बार ख़बरें आ रही हैं कि धमकाया जा रहा है. उसे बता देना, बाद में रोना-पछताना मत."
इस वीडियो के वायरल होने के बाद अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने आईपीएस अजयपाल शर्मा की निंदा की थी और हटाए जाने की मांग की थी.
चुनावी मैदान से हट गए जहांगीर ख़ान
माना जा रहा था कि फाल्टा सीट पर टीएमसी के जहांगीर ख़ान का मुकाबला बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज़्ज़ाक मोल्ला से है. सीपीआई (एम) के संभू नाथ कुर्मी को भी चुनावी मैदान में गिना जा रहा था.
जहाँगीर ख़ान के ख़िलाफ़ मतदाताओं को कथित धमकी और चुनावी अनियमितताओं के मामले में पांच, 10 और 15 मई को कुल पांच एफ़आईआर दर्ज़ हुई थीं.
हालांकि 18 मई को कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने फाल्टा में फिर से मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक जहांगीर ख़ान की गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी.
लेकिन एक दिन बाद ही जहांगीर ख़ान ने अचानक चुनावी रेस से बाहर होने की घोषणा कर दी. तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि यह उनका व्यक्तिगत फ़ैसला है न कि पार्टी का.
इस मामले पर जहाँगीर ख़ान ने कहा, "मैं फाल्टा की मिट्टी का बेटा हूँ. मैं हमेशा फाल्टा में शांति और विकास चाहता हूँ. मेरा सपना फाल्टा को सुंदर बनाना था. मुख्यमंत्री फाल्टा के लिए एक विशेष पैकेज देंगे और इसी वजह से मैं 21 मई को होने वाले मतदान से ख़ुद को अलग कर रहा हूँ."
उनकी इस घोषणा पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 'जहांगीर ख़ान भाग गए क्योंकि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिला.'
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को एक्स पर एक लंबी पोस्ट करके कहा, "फाल्टा विधानसभा सीट के दोबारा मतदान की मतगणना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आज दोपहर 3:30 बजे तक सभी 21 राउंड की गिनती पूरी हो गई, जबकि 4 मई को इसी समय तक सिर्फ़ 2 से 4 राउंड की गिनती हुई थी. देश चुनाव आयोग से इसका जवाब चाहता है."
उन्होंने दावा किया, "पिछले 10 दिनों में फाल्टा के 1000 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन चुनाव आयोग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. आचार संहिता लागू होने के बावजूद दिनदहाड़े पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई."
उन्होंने चुनाव आयोग पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है.
जहांगीर को वोट क्यों पड़े
चुनाव आयोग ने 21 मई को फाल्टा की सभी 285 बूथों पर दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया था.
आयोग ने 29 अप्रैल को हुए पहले के मतदान के दौरान "गंभीर चुनावी गड़बड़ियों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने" की रिपोर्ट मिलने के बाद यह फैसला लिया था.
नियमों के मुताबिक़, इस तरह के दोबारा मतदान में उम्मीदवारों की सूची और ईवीएम कॉन्फ़िगरेशन इस्तेमाल किया जाता है, जो पहले मतदान में था.
जहांगीर ख़ान का दक्षिण 24 परगना जिले में पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ थी. इसी वजह से लगातार तीन चुनाव और एक उपचुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उन्हें नया उम्मीदवार बनाया था.
चूंकि ईवीएम पर उनका नाम और टीएमसी का चुनाव चिह्न बना रहा, इसलिए मतदान करने पहुंचे लोगों के पास उसे दबाने का विकल्प मौजूद था.
यह वोट टीएमसी समर्थकों ने जानबूझकर दिया हो, या कुछ लोग उनके राजनीतिक एलान से अनजान रहे हों, या कुछ मतदाता उदासीन रहे हों.
जहांगीर ख़ान ने चुनावी मैदान से हटने का एलान तो किया लेकिन उन्होंने किसी और का समर्थन नहीं किया था.
वाम मोर्चे का प्रदर्शन
मई में हुए पांच राज्यों के चुनाव के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि भारत से वामपंथ की विदाई हो गई है.
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के हाथों हार के बाद वाम मोर्चा धीरे-धीरे कमज़ोर होता गया और उसकी जगह बीजेपी मज़बूत होती गई.
वाम मोर्चे की एकमात्र केरल में सरकार थी. हालिया विधानसभा चुनावों में वो भी चली गई और कहा जा रहा है कि 70 सालों में पहली बार ऐसा है कि देश में वाम मोर्चे की कोई सरकार नहीं है.
फाल्टा में होने वाले पुनर्मतदान से पहले विश्लेषणों में राजनीतिक पंडित चुनावी मैदान में बीजेपी, टीएमसी और कांग्रेस को तो मुकाबले में मान रहे थे लेकिन सीपीएम उम्मीदवार को सिर्फ़ गिनती में.
लेकिन फाल्टा सीट में जहांगीर ख़ान के चुनावी मैदान से हटने के बाद सीपीएम के शंभु नाथ कुर्मी दूसरे स्थान पर आ गए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.