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रियलिटी शो 'देसी ब्लिंग' से चर्चा में आईं ताबिंदा की कुछ लोग क्यों कर रहे हैं आलोचना
- Author, वंदना
- पदनाम, न्यूज़ एडिटर, बीबीसी
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
"जब से मैं अपने पति सतीश के साथ हूँ, मैं हर सुबह उनके पैरों की मालिश करती हूँ. वो किसी राजकुमार की तरह नींद से उठते हैं. हिंदू होने के नाते, वो मानते हैं कि अगर पत्नी रोज़ सुबह पति के पैर छूती है तो बहुत लक्ष्मी आती है."
नेटफ़्लिक्स के नए रियलिटी शो 'देसी ब्लिंग' के लगभग शुरू में ही ये सीन आता है, जिसमें दुबई में रहने वाले भारतीय अरबपति उद्योगपति सतीश सनपाल, अपनी पत्नी ताबिंदा से सुबह-सुबह पैरों की मालिश करवा रहे हैं.
इस शुरुआती सीन को देखकर ही बतौर दर्शक आप ठहर जाते हैं. 'देसी ब्लिंग' एक रियलिटी शो है जिसमें दुबई में रहने वाले अमीर भारतीय लोगों की आलीशान ज़िंदगी, उनके रिश्ते, बिज़नेस, सोशलाइट पार्टियाँ, राजनीति और पेचीदगियाँ दिखाई गई हैं.
इन्हीं किरदारों में शामिल हैं- टीवी स्टार तेजस्वी प्रकाश और करण कुंद्रा. और साथ में हैं सतीश सनपाल जो जबलपुर से हैं और उनकी पत्नी ताबिंदा.
ताबिंदा, एक पाकिस्तानी-ब्रिटिश हैं, पर उनकी कई पहचानें हैं- कोई उन्हें सिर्फ़ एक अमीर उद्योगपति की पत्नी के तौर पर देखता है, कोई सफल बिज़नेस-वुमेन के तौर पर.
कोई सोशल मीडिया पर एक मशहूर सोशलाइट के तौर पर पेश कर रहा है, तो कई लोगों ने शो में उनकी बातों को आपत्तिजनक और पेट्रिआर्की (मर्दवादी) भरी बताया है.
शो में जब ताबिंदा की सहेलियाँ उन्हें बताती हैं कि ताबिंदा के पति को कई लड़कियों के साथ देखा गया तो वो बहुत शांत रहती हैं.
और कहती हैं, "सतीश को अच्छा लगता है लड़कियों के साथ टाइम बिताना. मुझे कभी-कभी जलन होती है पर मुझे उस पर भरोसा है. अगर वो हर पार्टी में अलग-अलग लड़कियों के साथ है तो मुझे परेशानी नहीं. अगर वो एक ही लड़की के साथ बार-बार जा रहे हैं, बस तब दिक्कत है क्योंकि एक ही बंदे को बार-बार मिलोगे तो प्यार हो जाएगा."
ऐसी ही तमाम बातों को लेकर ताबिंदा वायरल हैं.
पुरुषवादी सोच
साइकॉलोजिस्ट निशा खन्ना ने रियलिटी शो के कॉन्टेस्टेंट के साथ भी काम किया है और मैरिज काउंसलिंग भी करती हैं.
निशा खन्ना कहती हैं, "ये दिखाता है कि ताबिंदा को ख़ुद पर ही भरोसा नहीं है. वो पैट्रियार्की या पुरुषवादी सोच की सचाई को स्वीकार कर चुकी हैं. क्या शो में यह सवाल ताबिंदा के पति से पूछा गया कि अगर ताबिंदा इस तरह पार्टियों में जाए और लड़कों से मिले, क्या वो इसे स्वीकार करेगा?"
इस पर फ़िल्ममेकर लक्ष्मी अय्यर ने सोशल मीडिया पर लिखा है, "एक रिएलिटी शो पर देखा कि एक पत्नी को कोई दिक्कत नहीं कि उसका पति उसके साथ धोखा कर रहा है, जब तक हर बार अलग अलग महिला हो."
"ऐसी (बकवास) बातों को नॉर्मलाइज़ करना बंद करो. वफ़ादार और ईमानदार होना आज भी एक आकर्षक गुण है. सोचिए स्तर कितना गिर गया है कि ओटीटी पर ये स्वीकार्य दिख रहा है."
'देसी ब्लिंग' शो के आलोचक हैं तो उसे पसंद करने वाले भी हैं.
फ़ेसबुक पर दुबई में रहने वाली अनीली ब्रिजलाल लिखती हैं, "मैं ये स्वीकार करती हूँ कि मुझे शो देखकर मज़ा आया. इसमें काफ़ी ड्रामा है... हर कोई दूसरे की पीठ में छुरा भोंक रहा है. अगला सीज़न लेकर आओ."
एंटरटेनमेंट ब्लॉगर मरिया मोट्स फ़ेसुबक पर लिखती हैं कि ये शो किसी ट्रेन रेक यानी दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन जैसा है, जिसे देखकर लगता है कि आपको आख़िर तक देखना ही पड़ेगा.
शो देखने के बाद निशा खन्ना कहती हैं, "देसी ब्लिंग ऐसा शो है जिसमें पैट्रियार्की है, पारिवारिक राजनीति है, ऐसे रिश्ते हैं जो सिर्फ़ पैसे और अपने मतलब के लिए बनाए जाते हैं."
"पर ये शो मनोरंजक है. लोग देखना चाहते हैं कि इतने अमीर लोग कैसे रहते हैं, क्या पहनते हैं, इनकी पार्टियाँ कैसी होती हैं. सो लोग देखेंगे."
'गोल्ड क्वीन' या 'गोल्ड डिगर'
'देसी ब्लिंग' में चर्चा इसकी महिला किरदारों की हो रही है लेकिन इसके पुरुष किरदार भी सवालों के घेरे में हैं.
मसलन जब ताबिंदा, करण कुंद्रा को सलाह देती हैं कि तेजस्वी उनके लिए सही जीवनसाथी नहीं है तो करण पीठ पीछे कहते हैं, "मैं सिर्फ़ उन लोगों से सलाह लेता हूँ जिन्होंने ज़िंदगी में कुछ हासिल किया हो. ताबिंदा भाभी की पहचान सिर्फ़ सतीश की पत्नी के तौर पर है."
करण की यह बात सोचने पर मजबूर करती है कि इतना बड़ा बिज़नेस अंपायर खड़ा करने में ताबिंदा ने अपने पति का साथ दिया, अपनी ख़ुद की कंपनी चलाती हैं, घर और बच्ची को संभाला.
क्या वो कोई उपलब्धि नहीं है? हालांकि तेजस्वी को लेकर दूसरे कन्टेस्टेंट्स के विरोध के बावजूद करण अंत में तेजस्वी के साथ खड़े नज़र आते हैं.
ताबिंदा, जिसे शो में सब बिंदा के नाम से बुलाते हैं, शायद इस सिरीज़ की सबसे चर्चित किरदार बन गई हैं - कुछ वैसे ही जैसे रियलिटी शो 'फ़ैबुलस वाइफ़्स वर्सिस बॉलीवुड वाइफ़्स़' के बाद शालिनी पस्सी छा गई थीं.
शो में ताबिंदा को ज़्यादातर समय सिर्फ़ एक अमीर उद्योगपति की पत्नी के तौर पर ही दिखाया गया है जो पार्टियों में आती जाती हैं, अपनी अमीरी का पूरा शो ऑफ़ करती हैं, बिना किसी लाग लपेट के.
तेजस्वी प्रकाश से पहली मुलाक़ात में ही ताबिंदा बताती है, "तुम्हें यक़ीन नहीं होगा मेरे पास 40 किलो सोना है. मेरे पति ने बेटी के पैदा होने से पहले ही उसके लिए गोल्ड की कटलटरी बनवाई थी. उसकी सोने की थाली, सोना का चम्मच है, सोने का ग्लास है."
"वो दुबई की सबसे अमीर बेबी है. पहले बर्थडे पर उसे 24 कैरेट गोल्ड की ड्रेस पहनाई थी. सतीश मेरे लिए हर साल तीन किलो सोना ख़रीदते हैं."
उनके पति ताबिंदा को 'गोल्ड क्वीन' बुलाते हैं जबकि कुछ लोग ताबिंदा को 'गोल्ड डिगर' कहते हैं.
कौन हैं ताबिंदा
लेकिन ताबिंदा के सोशल प्रोफ़ाइल पर जाएँ तो एक अलग ताबिंदा भी नज़र आती हैं.
लिंक्डइन पर ताबिंदा एनेक्स कैपिटल फ़ाइनेंशियल मार्केट्स की फ़ाउंडर और डायरेक्टर हैं.
उनकी कंपनी को 2025 में फ़ाइनेंशियल मार्केट में फ़ास्टेस्ट ग्रोइंग कंपनी का अवॉर्ड मिला था. वो बिज़नेस लिडरशिप, महिला उद्यमियों की बात करती हैं.
इंस्टाग्राम पर वो ख़ुद को मॉम और एंटरप्रेन्योर यानी मॉमप्रेन्योर और विज़नरी लीडर के तौर पर इंड्रोड्यूस करती हैं.
'देसी ब्लिंग' में ड्रामा, आपसी झगड़े, गॉसिप, ग्लैमर, साज़िशें सबकुछ है. बस समझ लीजिए कि दूसरे शो के मुताबिक़, भव्यता का लेवल 10 एक्स यानी 10 गुना है. लेकिन 'देसी ब्लिंग' शो जाने-अनजाने कई असहज सवाल भी छोड़ जाता है.
निशा खन्ना कहती हैं कि कई जगह ताबिंदा पुरुषवादी सोच को आगे बढ़ा रही हैं और ख़ुद इसका शिकार भी हैं.
शो में ताबिंदा उस संघर्ष की बात करती हैं, जब वो आठ साल तक माँ नहीं बन पाई थीं.
वो कहती हैं, "बच्चे के बिना बहुत मुश्किल है. आपको पता ही है कि भारतीय परिवारों में कैसा होता है?"
ताबिंदा ने अपने एम्ब्रियो लंदन में फ्रीज़ करवाए हुए हैं. वो आईवीएफ़ से दोबारा माँ बनना चाहती हैं.
पर क्या ताबिंदा के लिए दोबारा माँ बनना, अपने पति को दोबारा हासिल करने की एक आख़िरी कोशिश जैसा है?
जैसे बार-बार वो कहती हैं - अगर एक और बच्चा या बच्ची हमारी ज़िंदगी में आ जाए तो शायद सतीश पार्टियों में जाना छोड़ दें और हमारे मसले सुलझ जााएँ.
अगर पूरे शो की बात करें तो अथाह पैसा, बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ, आलीशान घर, ग्लैमर, दुबई की पार्टियाँ - 'देसी ब्लिंग' देखकर एक बारगी आँखे चौंधिया जाएँ तो बड़ी बात नहीं.
लक्ज़री ब्रैंड तो इतने सरसरी तरीके से आते हैं जैसे हमारे आपके घरों में आलू-प्याज़.
ब्लिंग यानी चमकीली, क़ीमती, दिखावटी चीज़ें.
'देसी ब्लिंग' चमक-दमक का ही नहीं अकेलेपन, ख़ालीपन और अधूरेपन का भी शो है, जिसे लग्ज़री सामानों, गहनों, नगीनों से ढका जाता है.
ये मनोरंजन भी है और चाहें तो सीख भी. 'देसी ब्लिंग' में क्या दिखावटी है और क्या क़ीमती ये दर्शकों की अपनी राय है.
जैसा कि सतीश सनपाल कहते हैं, "मैं हिंदी में ज़्यादा बात करता हूँ क्योंकि मुझे अंग्रेज़ी बोलनी नहीं आती लेकिन मेरा पैसा बोलता है."
हाँ, इस बीच ताबिंदा ज़रूर ज़ोरों-शोरों से छाई हुई हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.