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लू कब बन जाती है जानलेवा, जानिए इससे बचने के क्या हैं तरीके
- Author, शिवांगी जायसवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, इस पूरे सप्ताह दिल्ली समेत उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश हिस्से भीषण लू की चपेट में रहेंगे.
मौसम विभाग ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मंगलवार से तीन दिनों तक हीट वेव (लू) से जुड़ी चेतावनी का येलो अलर्ट जारी किया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली और भारत के दूसरे प्रदूषित हवा वाले शहरों में हीट वेव सेहत पर दोगुना असर डालती हैं.
नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर एम वली का कहना है कि येलो अलर्ट जल्द ही रेड अलर्ट में बदल सकता है इसलिए सभी को सतर्क हो जाना चाहिए.
वह कहते हैं, "अगर तेज़ गर्मी के चलते किसी को सांस लेने में तकलीफ़ होने लगे तो यह प्रदूषित हवा में हीट वेव के असर को दर्शाता है. यह शरीर में ऑक्सीजन के लेवल को कम करता है. यह ख़तरनाक हो सकता है."
वह कहते हैं, "यह मौसम दमा, ब्लड प्रेशर, दिल के मरीज़ों के लिए विशेष रूप से ख़तरनाक है क्योंकि लू के समय हवा में नमी कम होती है, जो हवा में प्रदूषित कणों को बढ़ा देती है. इसलिए संभव हो तो दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक बाहर न निकलें."
फ़ील्ड में काम करने वाले लोगों, स्कूल-कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट्स आदि के लिए दिन के समय बाहर निकलना मजबूरी होती है.
ऐसे में डॉक्टर वली की सलाह है, "स्लीवलेस कपड़े न पहनें और पूरा शरीर ढंकें. लोग काला छाता लेकर बाहर निकलते हैं, यह भी बहुत ऊष्मा सोखता है, बेहतर है कि सफ़ेद छाता इस्तेमाल करें. सिर को सफ़ेद कपड़े से ढंकना भी कारगर है."
वह कहते हैं कि "जो लोग सनस्क्रीन अफ़ोर्ड कर सकते हैं, वह एसपीएफ़-50 क्षमता वाली सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें, इससे कम क्षमता वाली सनस्क्रीन न लगाएं. साथ ही हर तीन घंटे बाद इसे दोबारा लगाएं क्योंकि इस अवधि के बाद यूवी किरणों से बचाने का इसका सुरक्षा कवच समाप्त हो जाता है."
लू के बीच अपने घर को ठंडा कैसे रखें
गर्मी से बचने के लिए ज़्यादातर लोग घर में समय बिताते हैं, ऐसे में घर के तापमान को नियंत्रित रखना भी ज़रूरी है.
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, रात की हवा का इस्तेमाल घर को ठंडा करने के लिए करें. इसके लिए अंधेरा होने पर खिड़कियां खोल लें लेकिन दिन में सूरज की गर्मी को घर में प्रवेश से रोकना ज़रूरी है.
इसके लिए घर की खिड़कियों को बंद रखें और पर्दा लगाकर तेज़ गर्मी वाली रोशनी को भी रोकें. इससे घर का तापमान स्थिर बना रह सकता है.
साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि अगर वातावरण का तापमान 40 डिग्री से कम है तो घर में लगे पंखे शरीर को ठंडा रख सकते हैं. मगर तापमान इससे अधिक होने पर पंखे शरीर को ठंडे की जगह गर्म करने लगते हैं. ऐसे में कूलर आदि का उपयोग करें.
अगर आपके पास एसी है तो उसे बहुत कम टेम्प्रेचर पर सेट किए बिना भी आप घर ठंडा बनाए रख सकते हैं.
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि एसी को 27 डिग्री तापमान पर सेट करें और साथ में एक पंखा भी चलाएं तो यह आपको चार डिग्री कम यानी 23 डिग्री की ठंडक का अहसास देगा. इससे आप बिजली भी बचा पाएंगे.
कोल्ड्र ड्रिंक शरीर ठंडा नहीं रखती
डॉक्टर वली बताते हैं कि गर्मी में क्या खाने से ज़्यादा हमारा फोकस इस बात पर होना चाहिए कि क्या नहीं खाना सेहतमंद होगा. भारी और ज़्यादा चिकनाई वाले खाद्य पदार्थ आम तौर पर नहीं खाने चाहिए क्योंकि इनमें ज़्यादा वसा और कैलोरी होती है जिसे पचाना कठिन होता है. इससे शरीर का तापमान बढ़ सकता है और आप खुद को ज़्यादा गर्म और सुस्त महसूस कर सकते हैं.
वह कहते हैं कि सेंधा नमक के इस्तेमाल से भी बचना चाहिए. साथ ही, खाते समय भोजन की मात्रा भी कम रखें. ऐसे मौसम में भूखे पेट या तुरंत भोजन करके बाहर न जाएं ताकि शरीर ठंडा और ऊर्जा से भरा रहे.
डब्ल्यूएचओ की सलाह है कि तेज़ गर्मी में ज़्यादा कैफ़ीन और अल्कोहल का इस्तेमाल न करें.
हर घंटे कम से कम एक कप पानी ज़रूर पियें भले ही आपको प्यास न लग रही हो. तरल पदार्थों का ज़्यादा से ज़्यादा सेवन करें. साथ ही, पूरे दिन में दो से तीन लीटर पानी पीना ज़रूरी है.
डॉक्टर वली कहते हैं, "यूथ को लगता है कि कोल्ड ड्रिंक या चिल्ड बीयर उन्हें ठंडा रखेगी लेकिन दोनों में ही शुगर ज़्यादा होती है, जो शरीर से पानी को बाहर निकालती हैं इससे डी-हाइड्रेशन होता है."
इसकी जगह वह सत्तू, लौकी का जूस, मट्ठा आदि पीने की सलाह देते हैं.
तेज़ गर्मी लगे पर पसीना न आए तो अलर्ट हो जाएं
बीबीसी के एक अन्य लेख के मुताबिक, अगर आपके शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो हीट स्ट्रोक हो सकता है. ऐसी स्थिति में आपको तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए.
अगर ये लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर की सलाह लें -
- पसीना आना बंद हो जाना- इस स्थिति में गर्मी लगती है लेकिन शरीर ख़ुश्क हो जाता है.
- सांस लेने में तकलीफ़ होना.
ध्यान रखें कि हीट स्ट्रोक से व्यक्ति बेहोश हो सकता है. शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को स्थायी नुक़सान हो सकता है. और गंभीर स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है.
ऐसे में शरीर को तुरंत ठंडा करें- अगर आपका शरीर उतना गर्म हो रहा है, जिस तापमान के आप आदी नहीं हैं तो आपको ये लक्षण महसूस हो सकते हैं- सिरदर्द, चक्कर आना, भूख कम लगना, जी मिचलाना, बहुत ज़्यादा पसीना आना, ऐंठन (क्रैम्प्स), तेज़ सांस चलना और बहुत ज़्यादा प्यास लगना.
ऐसे में आपको तुरंत अपनी गतिविधियों को सीमित करके शरीर के तापमान को सामान्य करने पर फोकस करना चाहिए, जिसके लिए ठंडी जगह पर जाएं या शरीर पर गीला कपड़ा रखें.
40 डिग्री ताप पर कैसे काम करता है हमारा शरीर
हीटवेव से असर को समझने के लिए बीबीसी के स्वास्थ्य व विज्ञान संवाददाता जेम्स गैलाघर ने 2023 में साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के इनवायरमेंट चेंबर में 40 डिग्री सेल्यियस तापमान महसूस करके इसके असर को समझा.
लेख के मुताबिक, वैज्ञानिक उपकरणों की देखरेख में उस चेंबर का तापमान धीरे-धीरे 21 डिग्री से 40.3 सेल्सियस तक बढ़ाया गया. जिससे ये बातें पता चलीं–
- दिमाग में खून का रिसाव 8.5% तक घट गया.
- सांसें लेने की गति प्रति मिनट 10 से 15 तक बढ़ गई.
- ह्दयगति प्रति मिनट 54 से 87 तक बढ़ गई.
- शरीर का तापमान 36.2 से 37.5 डिग्री सेल्सियस पहुंचा.
- एक घंटे के एक्सपेरिमेंट में 400 मिलीलीटर पसीना निकला.
- त्वचा का तापमान 31.3 से 35.4 डिग्री सेल्यिसस तक पहुंचा.
- इस प्रयोग के दौरान अधिकतम तापमान पर मेमोरी पजल स्कोर जांचा गया जो 23/30 से 17/30 रहा, जो दिमाग की याद रखने की क्षमता पर तापमान के असर को दर्शाता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.