कैसे फैली तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके के साथ आने की ख़बर, क्या ऐसा गठबंधन मुमकिन है?

- Author, ज़ेवियर सेल्वाकुमार
- पदनाम, बीबीसी तमिल
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में तमिलगा वेत्री कड़गम यानी टीवीके ने बड़ी संख्या में सीटें जीतीं, लेकिन उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिला.
234 सदस्यों वाली तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं जबकि सरकार बनाने के लिए 118 सीटें की ज़रूरत हैं. यानी बहुमत के आँकड़े से आठ सीटें कम हैं.
इसी संदर्भ में बुधवार को यह ख़बर फैली कि डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर सरकार बनाने जा रही हैं. डीएमके पक्ष ने तुरंत इस ख़बर का खंडन किया.
एआईएडीएमके के नेता सेम्मलाई ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, "चाहे कुछ भी हो जाए, एडप्पाडी पलानीस्वामी एक अच्छा, निर्णायक फैसला लेंगे. एडप्पाडी पलानीस्वामी 'किंग मेकर' नहीं हैं, वह 'किंग' हैं."
इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या राजनीतिक विचारधारा के विपरीत छोर पर स्थित इन दोनों पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाने की वाक़ई कोशिश की या अफ़वाह फैलाई गई.
पत्रकारों का कहना है कि इस तरह का प्रयास हुआ था.
डीएमके और एआईएडीएमके दोनों पार्टियां इस बात से साफ़ इनकार करती हैं.

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सोशल मीडिया पर पर चर्चा गर्म
कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए टीवीके नेता विजय को अपने पाँच विधायकों का समर्थन दिया है.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सिस्ट और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिलनाडु सहित विभिन्न पार्टियों ने कहा है कि वे अपने कार्यकारियों से परामर्श करने के बाद इस संबंध में घोषणा करेंगी.
इस स्थिति में, डीएमके के समर्थन से एआईएडीएमके सरकार बनने की ख़बर फैल गई. यह जानकारी उत्तर भारतीय मीडिया में भी फैली और एक बहस छिड़ गई.

इस दौरान तमिलनाडु के वरिष्ठ पत्रकार आर.के. राधाकृष्णन के वीडियो, "ऐसा मत करो!", ने काफ़ी ध्यान खींचा है .
हालांकि उन्होंने डीएमके-एआईएडीएमके गठबंधन का सीधे तौर पर ज़िक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि गठबंधन की अटकलों की वजह से सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है.
डीएमके ने खंडन किया
इस पर डीएमके की प्रतिक्रिया कुछ ही घंटों के भीतर सामने आ गई.
डीएमके सांसद कलानिधि वीरासामी ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, "कांग्रेस के विश्वासघात के बावजूद, डीएमके ने एक प्रभावी विपक्षी दल के रूप में काम करने का निर्णय लिया है. बीजेपी, एआईएडीएमके को नई सरकार का गठन रोकने के लिए दबाव बना रही है. यह जनादेश का अपमान है. मुझे उम्मीद है कि लोकतंत्र की जीत होगी."

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टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने कहा था, "विजय को सरकार बनाने दीजिए. छह महीने तक बिना किसी रुकावट के स्थिति का जायजा लेंगे. डीएमके संवैधानिक संकट या एक और चुनाव नहीं चाहती. नई सरकार को स्कूली बच्चों के लिए मुफ्त नाश्ता योजना और महिलाओं के लिए 1000 रुपये की महिला अधिकार योजना को जारी रखना चाहिए."
एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता सेम्मलाई से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "चाहे कुछ भी हो जाए, एडप्पाडी पलानीस्वामी एक अच्छा, निर्णायक फ़ैसला लेंगे. एडप्पाडी पलानीस्वामी 'किंग मेकर' नहीं हैं, वह 'किंग' हैं."

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बीबीसी तमिल से बात करते हुए एआईएडीएमके के प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा, "यह सवाल उन वरिष्ठ पत्रकारों से पूछा जाना चाहिए, जिन्होंने ऐसी जानकारी फैलाई. एक ही दिन में यह स्पष्ट हो गया कि झूठ ज़्यादा दिन नहीं टिकता. सच कहूं तो, मुझे लगता है कि ऐसी जानकारी पर टिप्पणी करने से हमारी प्रतिष्ठा में गिरावट आएगी."
डीएमके ने क्या कहा?
इस बारे में बोलते हुए डीएमके के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कहा, "यह कुछ पत्रकारों की ओर से बुनियादी नैतिकता का उल्लंघन करने का उदाहरण है."
सरवनन अन्नादुरई ने कहा कि केवल 'असली मीडिया' को ही यह पता लगाना चाहिए कि किस पत्रकार ने और किसके उकसावे पर यह जानकारी फैलानी शुरू की.
उन्होंने कहा कि यह जानकारी लोगों का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से फैलाई गई थी.
बीबीसी से बात करते हुए सरवनन अन्नादुरई ने कहा, "यह सब ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है."
क्या पत्रकार भ्रम फैला रहे हैं?
एआईएडीएमके के प्रवक्ता बाबू मुरुगावेल का कहना है कि जिसने भी यह जानकारी फैलाई, मीडिया को इसे नज़रअंदाज कर देना चाहिए था. उनका कहना है कि इससे अन्य मामलों से ध्यान नहीं भटकेगा.
बीबीसी तमिल से बात करते हुए बाबू मुरुगावेल ने कहा, "मुझे सच में नहीं पता कि ऐसी जानकारी कहां से आई. लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि मीडिया ने डीएमके और एआईएडीएमके जैसी दो अलग विचारधारा वाली पार्टियों के एक साथ सरकार बनाने की बात को इतनी आसानी से कैसे ले लिया.''
''अगर ऐसा हुआ, तो लोग अगले चुनाव में डीएमके और एआईएडीएमके दोनों को हरा देंगे और टीवीके भारी बहुमत से चुनाव जीत जाएगी. ऐसा करने से दोनों पार्टियों को भारी नुकसान होगा. ऐसा होना कभी संभव नहीं है."
बीबीसी तमिल से बात करते हुए द्रविड़ आंदोलन के विश्लेषक दुरई करुणा ने कहा, "तमिलनाडु की राजनीति में चाहे कितनी भी जीत और हार हों, डीएमके या एआईएडीएमके की ओर से इस तरह की पहल किए जाने की संभावना नहीं है."

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दुरई करुणा ने कहा, "कुछ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार बिना किसी विश्वसनीयता वाली बात फैलाते हैं. मेरा मानना है कि तमिल मीडिया जगत में इससे बचना चाहिए. अगर वे ऐसा करते रहे, तो अगले चुनाव में टीवीके 200 से अधिक सीटें जीत जाएगी."
उन्होंने कहा, "साथ ही, यह भी सच है कि इस जानकारी का कुछ हिस्सा राजनीतिक दलों के मीडिया में संपर्कों के जरिए पत्रकारों तक पहुंचाया जा रहा है. पत्रकारों को ब्रेकिंग न्यूज़ की रिपोर्टिंग और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, चाहे जानकारी कहीं से भी आई हो."
बीबीसी तमिल से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार आरके राधाकृष्णन ने कहा, "यह कोई अफ़वाह या अटकल नहीं है. हमारे पास जो जानकारी है, उसके अनुसार ऐसा करने का प्रयास किया गया था. यह सच है. मैंने गठबंधन सरकार का जिक्र नहीं किया. मैंने सिर्फ़ इतना लिखा था कि ऐसा नहीं होना चाहिए. उसके बाद क्या हुआ, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.































