गुरुवार, 01 फ़रवरी, 2007 को 07:56 GMT तक के समाचार
मोनिका चड्ढा
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
हिंदू विधवाओं के कष्टों पर आधारित दीपा मेहता की विवादास्पद फ़िल्म वाटर को ऑस्कर नामांकन के बाद अब भारत में रिलीज़ किया जाएगा.
इस फ़िल्म की शूटिंग के दौरान काफी विवाद हुआ था और हिंदूवादी संगठनों ने इसकी शूटिंग में बाधा डाली थी.
यह फ़िल्म कनाडा की ओर से ऑस्कर के लिए भेजी गई थी जो पांच शीर्ष फ़िल्मों में चुनी गई है. इन पांच फ़िल्मों मे से किसी एक को ऑस्कर मिलेगा.
फ़िल्म की निर्देशक दीपा मेहता भारतीय मूल की हैं लेकिन अब वो कनाडा की नागरिकता ले चुकी हैं.
भारत की ओर से रंग दे बसंती को ऑस्कर के लिए भेजा गया था लेकिन वह अंतिम पांच में नहीं पहुंच सकी.
समस्या
भारत में वाटर का वितरण बीआर फ़िल्मस कर रहा है. बीआर फ़िल्मस के बिजनेस डाइरेक्टर संजय भूटियानी ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने वाटर के प्रोड्यूसर के साथ इसके भारत में प्रदर्शन के लिए बहुत पहले ही समझौता कर लिया था.
भूटियानी के अनुसार वाटर में काम कर रहे जॉन अब्राहम ने बीआर फ़िल्मस के रवि चोपड़ा को यह फ़िल्म दिखाई थी.
भूटियानी कहते हैं ' बीआर फ़िल्मस के कई लोगों ने प्राइवेट स्क्रीनिंग में फ़िल्म देखी और तुरंत फ़ैसला किया कि हम इसका वितरण करेंगे. हम मार्च तक इसे रिलीज़ कर सकते हैं. '
उन्हें उम्मीद है कि रिलीज़ के दौरान फ़िल्म से कोई और विवाद नहीं जुड़ेगा.
फ़िल्म की निर्देशक दीपा मेहता ने भी बीबीसी से बातचीत में उम्मीद जताई कि फ़िल्म की रिलीज़ में के दौरान कोई विवाद नहीं होगा.
भूटियानी बताते हैं कि उनकी योजना देश के दस बीस थियेटरों में यह फ़िल्म रिलीज़ करने की है.
दीपा मेहता ने तीन फ़िल्मों की शृंखला बनाई है जिसमें पहली फायर (fire) , दूसरी अर्थ (earth), और तीसरी वाटर (water) है.
दीपा की तीनों ही फ़िल्में विवादास्पद रही है. जहां फायर दो महिलाओं के आपसी संबंधों पर आधारित थी वहीं अर्थ भारत विभाजन पर बनी थी.
वाटर 1930 के दशक के बनारस में हिंदू विधवाओं की दिक्कतों को दर्शाता है और बनारस में इसकी शूटिंग के दौरान कुछ संगठनों ने काफी तोड़फोड़ की थी.
यह फ़िल्म 2005 में टोरंटो फ़िल्म उत्सव कई अन्य अंतरराष्ट्रीय समारोहों में प्रदर्शित की गई है.