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पैकेज्ड फ़ूड ने बढ़ाई खाने की मात्रा, थाली परोसते समय किन बातों का रखें ध्यान?
- Author, सारा बेल
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ग्लोबल हेल्थ
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
यूं तो सब जानते हैं कि गर्मी में खाने की मात्रा का सबसे ज़्यादा ध्यान रखना चाहिए, कम व हल्का भोजन आपको हेल्दी रख सकता है. मगर दुनिया के विकसित से लेकर विकासशील देशों तक में थाली में परोसे जाने वाले भोजन की मात्रा बढ़ गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा बीते 50 साल के दौरान हुआ है. अब बाज़ार में बड़े साइज़ का सोडा और बड़े बर्गर इसकी मिसाल हैं.
अमेरिका में 1980 के दशक से यह बदलाव दिखाई देने लगा था.
एक अध्ययन के अनुसार, अगर प्लेट में दोगुनी मात्रा का भोजन परोसा जाए तो लोग अपनी भूख से 35% ज़्यादा खाना खा लेते हैं. ज़ाहिर है कि इसका सीधा असर मोटापे की दर पर भी पड़ रहा है.
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फ़ूड इंडस्ट्री के बढ़ते विज्ञापनों के बीच यह ज़रूरी लेकिन चुनौतीपूर्ण भी हो गया है कि हम ज़रूरत से ज़्यादा न खाएं.
यह भोजन का 'अमेरिकीकरण'
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में पोषण की प्रोफ़ेसर डॉक्टर लिसा यंग ने इस ट्रेंड की शुरुआत के बारे में 'द फ़ूड चेन' प्रोग्राम में कहा, "जब खाना सस्ता हुआ तो बेचने वालों ने थोड़ी सी ज़्यादा कीमत पर दोगुना भोजन देना शुरू कर दिया. खाना खरीदने वाले को भी इसमें फ़ायदा नज़र आने लगा."
डॉक्टर लिसा यंग इसे मूल रूप से अमेरिकी भोजन प्रणाली का असर मानती हैं.
वह कहती हैं, "यह मुख्यत: खाने के अमेरिकीकरण के चलते हो रहा है. जैसे-जैसे मैकडॉनल्ड्स या कुछ कैंडी बार जैसे अमेरिकी खाद्य उत्पाद दूसरे देशों में पहुंच रहे हैं, वहां भी भोजन की मात्रा बढ़ती जा रही है. ऐसे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड खाने से शरीर में 500 कैलोरी ज़्यादा जा रही हैं."
थाली में परोसे भोजन की मात्रा से इतना फ़र्क क्यों
ब्राज़ील के साओ पाउलो विश्वविद्यालय में सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण की प्रोफ़ेसर डॉक्टर मार्ले अलवरेंगा का कहना है, "प्लेट में ज़्यादा मात्रा में परोसे गए भोजन का ट्रेंड ब्राज़ील जैसे विकासशील देशों में भी देखा जा रहा है."
सिडनी स्थित न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ साइकोलॉजी की प्रोफ़ेसर लेनी वर्तनियन कहती हैं, "ऐसा भी नहीं है कि बड़ी मात्रा वाली पूरी थाली लोग चट कर जाते हैं, हमने देखा है कि अक्सर लोग थाली में खाना छोड़ देते हैं. लेकिन ज़्यादा भोजन वाली थाली में खाना खाते समय लोग औसतन ज़्यादा मात्रा खा लेते हैं."
उनका कहना है, "अक्सर हमारा शरीर, पेट भरने से जुड़े सही संकेत नहीं देता. ऐसे में हम अक्सर भोजन के पोर्शन को ही खाने की सही मात्रा का सही गाइड मान लेते हैं."
प्रोफ़ेसर लेनी वर्तनियन कहती हैं, "भोजन करते समय अक्सर हम न तो बहुत ज़्यादा भूखे होते हैं या फिर न तो बहुत ज़्यादा पेट भरा होता है. हम आमतौर पर बीच की स्थिति में होते हैं, जहां कई बाहरी संकेत हमें प्रभावित कर सकते हैं."
छोटी प्लेट का इस्तेमाल क्या कारगर होगा?
पहले ऐसा माना जाता था कि भोजन को छोटी प्लेट में परोसने से इस समस्या का हल निकाला जा सकता है. तर्क था कि प्लेट में कम खाना आएगा और हमें देखने में प्लेट भरी हुई लगेगी. मगर वैज्ञानिक शोधों में यह सिद्धांत खरा नहीं उतरा.
प्रोफ़ेसर लेनी वर्तनियन कहती हैं, "सिर्फ़ प्लेट का आकार लोगों के खाने पर असर नहीं डालता. असली फ़र्क इस बात से पड़ता है कि अतिरिक्त भोजन उपलब्ध है या नहीं."
इसका मतलब है कि अगर खाना पास रखी सर्विंग डिश में है तो लोग इसे दोबारा परोस लेंगे, फिर चाहे प्लेट का आकार कुछ भी हो.
वह सलाह देती हैं कि ऐसे में लोगों को थाली में भोजन परोसने के बाद बाकी भोजन को वहां से हटा देना चाहिए ताकि आप उसे दोबारा न परोस सके.
अपनी भूख को समझना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे अहम बात है कि लोग अपनी भूख को समझते हुए खाने की प्लेट पर ध्यान दें.
डॉक्टर लिसा यंग कहती हैं, "अक्सर लोग अपनी प्लेट पर ध्यान नहीं देते. वे अपनी भूख या पेट भरने के संकेतों को नहीं समझते इसलिए वे भूख से ज़्यादा खाना खा लेते हैं.
साथ ही वे पोर्शन डिस्टॉर्शन को भी अहम समस्या बताती हैं, जिसमें हमें समय के साथ भोजन की बढ़ी हुई मात्रा सामान्य लगने लगती है.
दरअसल रेस्तरां का खाना खाने, पैकेट वाले स्नैक्स खरीदने और बड़े बर्तनों में भोजन करने से समय के साथ हमारे दिमाग में 'सामान्य खाने की मात्रा' की समझ बदल जाती है.
पैक्ड फ़ूड के लेबल को पढ़ने से मदद मिलेगी
भोजन करते समय फिर आखिर कैसे खुद पर नियंत्रण रखा जाए? विशेषज्ञों की मानें तो आपको पैक्ड फ़ूड के लेबल में इसका हल मिल सकता है.
डॉक्टर लिसा यंग समझाती हैं, "अगर आप पैकेज्ड चीजें खाते हैं, तो उस पर लिखा होता है कि एक स्टैंडर्ड सर्विंग क्या है, जैसे- एक डिब्बे में चार सर्विंग्स. वह कहती हैं कि इन सर्विंग को निकालकर आपको तुलना करनी चाहिए कि आप आखिर कितनी सर्विंग फ़ूड खा गए."
वे बताती हैं, 'लोग कहते हैं कि वह सिर्फ़ एक कटोरा सीरियल्स खाते हैं. लेकिन जब हम उन्हें कहते हैं कि वे जितना खाते हैं, उसे निकालकर दिखाएं और उसकी लेबल से तुलना करें, तब पता चलता है कि असल में वे सर्विंग के मुकाबले तीन गुना ज़्यादा खा रहे होते हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.