तुलसी गबार्ड ने अचानक दिया इस्तीफ़ा, ट्रंप ने उनके इस्तीफ़े पर की ये टिप्पणी

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- Author, एना फेग्यू और सरीन हबेशियन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
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अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने पति को कैंसर होने का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
गबार्ड के पति को हाल ही में बोन कैंसर होने का पता चला है.
शुक्रवार को अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा, "उनकी ताक़त और प्यार ने हर चुनौती में मेरा साथ दिया है. मेरा विवेक ये नहीं कहता है कि वह इस लड़ाई का अकेले सामना करें और मैं इस डिमांडिंग और समय लेने वाले पद पर बनी रहूं.''
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गबार्ड के इस फै़सले के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "गबार्ड ने अपने पद पर रहते हुए बेहतरीन काम किया है. हमें उनकी कमी महसूस होती रहेगी.''
गबार्ड का इस्तीफ़ा 30 जून से प्रभावी होगा.
ट्रंप ने कहा कि प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर एरॉन लुकास कार्यवाहक डायरेक्टर की ज़िम्मेदारी संभालेंगे.
2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान गबार्ड ने ट्रंप का समर्थन किया था.
2025 में ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के कुछ ही हफ़्तों के बाद उन्हें अमेरिकी ख़ुफ़िया तंत्र की सबसे शक्तिशाली हस्तियों में शामिल किया गया था.
लेकिन इस साल वह सार्वजनिक रूप से काफ़ी कम दिखाई दीं. इस दौरान अमेरिका ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की, क्यूबा पर दबाव बढ़ाया और वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति को हटाने जैसी कार्रवाई की.
विदेशी युद्धों में अमेरिकी दख़ल की विरोधी

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गबार्ड ट्रंप प्रशासन में कैबिनेट छोड़ने वाली चौथी सदस्य हैं. इससे पहले अप्रैल में श्रम मंत्री लोरी चावेज-डीरेमर ने पद छोड़ा था. होमलैंड सिक्योरिटी मिनिस्टर क्रिस्टी नोएम और अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी भी इस साल ट्रंप प्रशासन से अलग हो चुके हैं.
अपने त्यागपत्र में गबार्ड ने लिखा कि उनके पति अब्राहम आने वाले हफ़्तों और महीनों में 'बड़ी चुनौतियों' का सामना करेंगे.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि गबार्ड " इस समय अपने पति के साथ रहना चाहती हैं. वो उन्हें फिर से स्वस्थ करने में मदद करना चाहती हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि वह जल्द ही पहले से भी बेहतर हो जाएंगे."
अपने राजनीतिक करियर के दौरान गबार्ड ने विदेश में होने वाले युद्धों में अमेरिकी हस्तक्षेप का विरोध करने वाली नेता की छवि बनाई थी.
ट्रंप ने जब ईरान पर हमला करने का फ़ैसला किया तब भी प्रशासन से उनका तनाव दिखा था.
ईरान पर इसराइल की कार्रवाई के बाद उन्होंने खुलकर इसका समर्थन नहीं किया.
मार्च में कांग्रेस की सुनवाई के दौरान संघर्ष के संभावित नतीजों के पर पूछे गए सवालों से वो सावधानी से बचती रहीं.
डेमोक्रेट नेताओं ने उनके सामने ये सवाल उठाए थे कि व्हाइट हाउस और ख़ुफ़िया एजेंसियों के दावों में ईरान की परमाणु क्षमता को लेकर अंतर क्यों दिख रहा है?

पिछले साल ट्रंप ने कांग्रेस के सामने गबार्ड के उस बयान को भी ख़ारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा है.
उस समय ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, "मुझे फ़र्क नहीं पड़ता कि उन्होंने क्या कहा. मुझे लगता है कि वो परमाणु हथियार बनाने के बहुत क़रीब थे."
ट्रंप लगातार ईरान की परमाणु क्षमता को युद्ध की वजह बताते रहे हैं.
गबार्ड का इस्तीफ़ा उनके शीर्ष सहयोगी और पूर्व नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर निदेशक जो केंट के इस्तीफ़े के दो महीने बाद आया है.
केंट ने ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन छोड़ते हुए राष्ट्रपति से 'अपना रुख़ बदलने' की अपील की थी.
हालांकि, केंट के इस्तीफ़े के बाद गबार्ड ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप के ईरान संबंधी फ़ैसले का समर्थन किया था.
उन्होंने कहा था कि कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्रपति ही तय करते हैं कि कौन-सा ख़तरा फौरी है और कौन सा नहीं.
सैनिक, राजनेता और सबसे बड़े ख़ुफ़िया तंत्र के चीफ़ तक सफ़र

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इराक़ में मेडिकल यूनिट में अपनी सेवा दे चुकीं पूर्व सैनिक गबार्ड ने अपने राजनीतिक जीवन में कई रिकॉर्ड बनाए.
वह 2002 में 21 साल की उम्र में हवाई की असेंबली के लिए चुनी गईं. ऐसा करने वाली सबसे युवा शख़्स थीं.
बाद में उनकी नेशनल गार्ड यूनिट को इराक़ भेजा गया, जिसके कारण उन्होंने एक कार्यकाल के बाद पद छोड़ दिया.
इसके बाद वह 2013 से 2021 तक वो डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से हवाई से कांग्रेस की सदस्य रहीं.
अमेरिकी कांग्रेस में पहुँचने वाली पहली हिंदू प्रतिनिधि बनीं.
2020 वो राष्ट्रपति पद की दौड़ में भी शामिल थीं. लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली. उस दौरान उन्होंने विदेशी युद्धों में हस्तक्षेप विरोधी नीति को प्रमुख मुद्दा बनाया था.
2022 में उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी और खुद को निर्दलीय घोषित कर दिया.
उन्होंने अपनी पूर्व की पार्टी को "युद्ध समर्थक इलिट समूह" बताया था, जो "डरपोक वोक राजनीति" से प्रेरित है.
फ़ॉक्स न्यूज़ की टिप्पणीकार के रूप में उन्होंने जेंडर और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर खुलकर राय रखी और बाद में ट्रंप की मुखर समर्थक बन गईं.
इसके बाद वह रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गईं.
उन्होंने 2024 में ट्रंप का समर्थन किया. उनके साथ चुनाव प्रचार किया. ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद ट्रांजिशन टीम का हिस्सा भी रहीं.
चुनाव जीतने के तुरंत बाद ट्रंप ने उन्हें नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के पद पर नॉमिनेट किया.
इस पद पर रहते हुए वह कई अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच को-ऑर्डिनेशन का काम करती थीं और राष्ट्रपति ट्रंप को सलाह देती थीं.
उनके नेतृत्व में अमेरिकी ख़ुफ़िया तंत्र को छोटा किया गया. पिछले साल एजेंसी के लगभग 50 फ़ीसदी कर्मचारियों की कटौती की योजना का एलान करते हुए उन्होंने कहा था कि पिछले दो दशकों में यह एजेंसी 'ज़रूरत से ज़्यादा बड़ी और अक्षम' हो गई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित





























